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वेद विषयक भ्रान्ति निवारण

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लेखक - यशपाल एवं राज आर्य वेदों के विषय में हमें कई भ्रांतियां हो जाती हैं, जिनका सत्य हमें ज्ञात नहीं होता, आज हम उन्हीं सत्य बातों को प्रमाण के आधार पर बताएंगे। आइए सत्य को ग्रहण करें और असत्य को छोड़ें, क्योंकि सत्य से बढ़ कर समस्त मानव जाति की उन्नति का कोई दूसरा कारण नहीं है। तो आइए अब हम विषय को प्रारंभ करते हैं। वेद कितने हैं? कुछ लोग कहते हैं कि शुरू में वेद सिर्फ एक था, जिसको महर्षि व्यास जी ने चार भागों में विभाजित करके चार वेद बनाया, यह कथन मिथ्या है क्योंकि अथर्ववेद में वेद शब्द का बहुवचन आया है, देखिए प्रमाण यस्मिन्वेदा निहिता विश्वरूपा:। [अथर्व ० ४/३५/६] इसी प्रकार अथर्ववेद १९/९/१२ में भी वेद बहुवचन में आया है - ब्रह्म प्रजापतिर्धाता लोका वेदाः सप्तऋषयोऽग्नयः। तैर्मे कृतं स्वस्त्ययनमिन्द्रो मे शर्म यच्छतु ब्रह्मा मे शर्म यच्छतु। विश्वे मे देवाः शर्म यच्छन्तु सर्वे मे देवाः शर्म यच्छन्तु॥ आदि में एक वेद मानने वाले पक्ष का निवारण करते हुए महर्षि दयानंद जी सत्यार्थ प्रकाश के 11वें समुल्लास में लिखते हैं ऋषियों के प्रायः सभी ग्रंथों में हमें सर्वत्र ऋक्, यजुः, साम ही लिखा द...

क्या मनुष्य की आयु पहले से ही निर्धारित होती है

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कुछ लोगों का यह विचार होता है कि मनुष्य की आयु पूर्व निर्धारित होती है जबकि कुछ लोग कहते हैं कि मनुष्य की आयु पूर्व निर्धारित नहीं होती है, इसका सही उत्तर हमें चरक संहिता में मिलता है, तो आइए जानते हैं, क्या मनुष्य की आयु पूर्व निर्धारित होती है चरक संहिता के विमानस्थान के अध्याय 3 में भगवान् आत्रेय जी से अग्निवेश जी पूछते हैं किं न खलु भगवन्! नियतकालप्रमाणमायुः सर्वं न वेति||३२|| अर्थात् भगवन्! क्या आयु का परिमाण व समय सब निश्चित है वा अनिश्चित? इस पर आत्रेय जी उत्तर देते हैं भगवानुवाच - इहाग्निवेश ! भूवानामायुर्युक्तिमपेक्षते॥३३॥ देवे पुरुषकारे च स्थितं हास्य बलाबलम्। भगवान् आत्रेय ने कहा-हे अग्निवेश! प्राणियों की आयु, दैव और पुरुषकार इन दोनों का योग चाहती है। इसलिये आयु का बल और अबल दैव और पुरुषार्थ पर स्थित है॥ दैव मात्मकृतं विद्यात्कर्म यत्पौर्वदेहिकम्॥३४॥ स्मृतः पुरुषकारस्तु क्रियते यदिहापरम्। बलाबल विशेषोऽस्ति तयोरपि च कर्मणोः॥३५॥ अपने शरीर से जो कर्म पूर्व जन्म में किये हों उन को 'दैव' जानें और इस जन्म में जो कर्म किया जाता है उसे 'पुरुषकार'  कहा है। इन दोनों प...

आत्मा साकार या निराकार

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(जिन मित्रों ने प्रमाण खोजने में सहायता की है, हम उन सभी का धन्यवाद व आभार व्यक्त करते हैं) कुछ लोगों को भ्रम हो गया है कि आत्मा साकार होती है, आज हम इस पोस्ट में आर्ष प्रमाणों के आधार पर जानेंगे कि आत्मा साकार है या निराकार। तो आइए लेख को प्रारंभ करते हैं। सर्वप्रथम हम पंचावयव से अपनी बात सिद्ध करते हैं- प्रतिज्ञा - जीवात्मा निराकार है। हेतु - रूप से रहित होने से। जो जो वस्तुएं रूप, शक्ल से युक्त होती हैं, वे साकार होती हैं। उदाहरण - घड़ा उपनय - घड़े के तरह आत्मा में रूप गुण नहीं है। निगमन - अतः आत्मा निराकार है। अब हम आर्ष प्रमाण उद्धृत करते हैं- सत्यार्थ प्रकाश के 14वें समुल्लास में मं० ७| सि० ३०| सू० ७८| आ० २६|३४|३८ की समीक्षा में देखिए वहां पर महर्षि दयानंद जी रूह (आत्मा) को निराकार लिखते हैं महर्षि दयानंद जी ने पूना में प्रवचन दिया था उनमें से 15 प्रवचनों का संकलन उपदेश मंजरी नाम की पुस्तक में है। इसके प्रथम उपदेश में देखिए, यहां भी आत्मा को निराकार कहा है उपदेश मंजरी का चतुर्थ उपदेश भी देखिए उसमें भी आत्मा को निराकार कहा है महर्षि दयानन्द सरस्वती का पत्र-व्यवहार, भाग १ देखि...

क्या श्री हनुमान् जी आदि बंदर थे या मनुष्य

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कई लोग ऐसा सोचते हैं कि श्री हनुमान जी आदि बंदर थे इस पोस्ट में हम इसी बात की समीक्षा करेंगे क्या वास्तव में हनुमान जी आदि बंदर थे या मनुष्य थे वाल्मीकि रामायण में जब श्री राम जी से श्री हनुमान जी मिलते हैं तो श्री राम जी श्री लक्ष्मण जी से हनुमान जी को वेदों के विद्वान बताते हैं। व्याकरण शास्त्र के ज्ञाता बताते हैं। वाल्मीकि रामायण किष्किंधा कांड तृतीय सर्ग अब आप बुद्धि से विचार करें क्या कोई बंदर वेदों का ज्ञानी हो सकता है, क्या बंदर शब्दों का एकदम सही तरीके से उच्चारण कर सकता है, कि उसके शब्दों के उच्चारण में एक भी गलती ना हो, व्याकरण के नियम मनुष्य के कंठ, मूर्धा आदि के अनुसार बने होते हैं न कि बन्दर के अब कुछ लोगों को शंका हो सकती है कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार हनुमान जी को लांगूल थी, अगर वे मनुष्य होते तो लांगूल क्यों होती? यह हमें उचित तर्क जान पड़ता है किंतु थोडी गहराई से वाल्मीकि रामायण पढ़ने पर इसका भी उत्तर मिल जाता है रावण अपने दरबार में जब जब हनुमान जी को मारने की बात कहता है, तो विभीषण वहां पर दूत को मारना अनुचित बता कर कोई दूसरा दंड देने को कहते हैं, तो वहां पर हनुमान ज...