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Showing posts from May, 2021

आत्मा साकार या निराकार

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(जिन मित्रों ने प्रमाण खोजने में सहायता की है, हम उन सभी का धन्यवाद व आभार व्यक्त करते हैं) कुछ लोगों को भ्रम हो गया है कि आत्मा साकार होती है, आज हम इस पोस्ट में आर्ष प्रमाणों के आधार पर जानेंगे कि आत्मा साकार है या निराकार। तो आइए लेख को प्रारंभ करते हैं। सर्वप्रथम हम पंचावयव से अपनी बात सिद्ध करते हैं- प्रतिज्ञा - जीवात्मा निराकार है। हेतु - रूप से रहित होने से। जो जो वस्तुएं रूप, शक्ल से युक्त होती हैं, वे साकार होती हैं। उदाहरण - घड़ा उपनय - घड़े के तरह आत्मा में रूप गुण नहीं है। निगमन - अतः आत्मा निराकार है। अब हम आर्ष प्रमाण उद्धृत करते हैं- सत्यार्थ प्रकाश के 14वें समुल्लास में मं० ७| सि० ३०| सू० ७८| आ० २६|३४|३८ की समीक्षा में देखिए वहां पर महर्षि दयानंद जी रूह (आत्मा) को निराकार लिखते हैं महर्षि दयानंद जी ने पूना में प्रवचन दिया था उनमें से 15 प्रवचनों का संकलन उपदेश मंजरी नाम की पुस्तक में है। इसके प्रथम उपदेश में देखिए, यहां भी आत्मा को निराकार कहा है उपदेश मंजरी का चतुर्थ उपदेश भी देखिए उसमें भी आत्मा को निराकार कहा है महर्षि दयानन्द सरस्वती का पत्र-व्यवहार, भाग १ देखि...

क्या श्री हनुमान् जी आदि बंदर थे या मनुष्य

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कई लोग ऐसा सोचते हैं कि श्री हनुमान जी आदि बंदर थे इस पोस्ट में हम इसी बात की समीक्षा करेंगे क्या वास्तव में हनुमान जी आदि बंदर थे या मनुष्य थे वाल्मीकि रामायण में जब श्री राम जी से श्री हनुमान जी मिलते हैं तो श्री राम जी श्री लक्ष्मण जी से हनुमान जी को वेदों के विद्वान बताते हैं। व्याकरण शास्त्र के ज्ञाता बताते हैं। वाल्मीकि रामायण किष्किंधा कांड तृतीय सर्ग अब आप बुद्धि से विचार करें क्या कोई बंदर वेदों का ज्ञानी हो सकता है, क्या बंदर शब्दों का एकदम सही तरीके से उच्चारण कर सकता है, कि उसके शब्दों के उच्चारण में एक भी गलती ना हो, व्याकरण के नियम मनुष्य के कंठ, मूर्धा आदि के अनुसार बने होते हैं न कि बन्दर के अब कुछ लोगों को शंका हो सकती है कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार हनुमान जी को लांगूल थी, अगर वे मनुष्य होते तो लांगूल क्यों होती? यह हमें उचित तर्क जान पड़ता है किंतु थोडी गहराई से वाल्मीकि रामायण पढ़ने पर इसका भी उत्तर मिल जाता है रावण अपने दरबार में जब जब हनुमान जी को मारने की बात कहता है, तो विभीषण वहां पर दूत को मारना अनुचित बता कर कोई दूसरा दंड देने को कहते हैं, तो वहां पर हनुमान ज...