आत्मा साकार या निराकार
(जिन मित्रों ने प्रमाण खोजने में सहायता की है, हम उन सभी का धन्यवाद व आभार व्यक्त करते हैं) कुछ लोगों को भ्रम हो गया है कि आत्मा साकार होती है, आज हम इस पोस्ट में आर्ष प्रमाणों के आधार पर जानेंगे कि आत्मा साकार है या निराकार। तो आइए लेख को प्रारंभ करते हैं। सर्वप्रथम हम पंचावयव से अपनी बात सिद्ध करते हैं- प्रतिज्ञा - जीवात्मा निराकार है। हेतु - रूप से रहित होने से। जो जो वस्तुएं रूप, शक्ल से युक्त होती हैं, वे साकार होती हैं। उदाहरण - घड़ा उपनय - घड़े के तरह आत्मा में रूप गुण नहीं है। निगमन - अतः आत्मा निराकार है। अब हम आर्ष प्रमाण उद्धृत करते हैं- सत्यार्थ प्रकाश के 14वें समुल्लास में मं० ७| सि० ३०| सू० ७८| आ० २६|३४|३८ की समीक्षा में देखिए वहां पर महर्षि दयानंद जी रूह (आत्मा) को निराकार लिखते हैं महर्षि दयानंद जी ने पूना में प्रवचन दिया था उनमें से 15 प्रवचनों का संकलन उपदेश मंजरी नाम की पुस्तक में है। इसके प्रथम उपदेश में देखिए, यहां भी आत्मा को निराकार कहा है उपदेश मंजरी का चतुर्थ उपदेश भी देखिए उसमें भी आत्मा को निराकार कहा है महर्षि दयानन्द सरस्वती का पत्र-व्यवहार, भाग १ देखि...