रामायण में अश्लीलता की समीक्षा
अक्सर आपने कुछ लोगों को यह आक्षेप लगाते सुना होगा कि रामायण में अनेक अश्लील बातें लिखी हुई हैं। इन्हीं प्रसंगों को लेकर वे लोग रामायण का बहुत उपहास करते हैं। प्रथम आक्षेप- रामायण अरण्यकाण्ड के 46वें सर्ग में माता सीता के लिए गलत शब्दों का प्रयोग किया गया है। वहां सीता जी के स्तनों आदि की बात की गई है, देखें प्रमाण- अरण्य काण्ड सर्ग ४६ महर्षि वाल्मीकि को इन सबका कैसे पता चल गया? उत्तर - जरा वह प्रकरण देखें यहां रावण सन्यासी वेश में आ कर ऐसा बोल रहा है। वहां रावण सन्यासी रूप में आया है, अभी तक उसने अपने वास्तविक स्वरूप को देवी सीता जी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया और सन्यासी वेश में ही सीता जी से ऐसा बोल रहा है। यदि रावण को ऐसी बातें शुरू में ही बोलनी होती तो वह सन्यासी का वेश क्यों धारण करता? अब विचारिए अगर सीता जी के समक्ष सन्यासी वेश में रावण ऐसी बात कहता तो अवश्य ही सीता जी उसको भिक्षा नहीं देतीं और न ही सम्मान से उसे बैठने को कहतीं क्योंकि यह शब्द सुन कर ही वह समझ जातीं कि यह कोई सन्यासी नहीं अपितु कोई दुष्टात्मा है क्योंकि धर्म बाहरी दिखावे से लक्षित नहीं होता, इसीलिए भगवान् मनु...